रामायण का सच

विदेशी आर्य ब्रह्मणो ने क्या लिख रखा है रामायण में हम मूलनिवासियो के बारे में👇

खुद से पढना लिखना सीखो बिना ब्रह्मणो के :-

🚩 रामचरितमानस 🚩

1️⃣ जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।
पनारि मुई गृह संपति नासी। मूड़ मुड़ाइ होहिं संन्यासी॥3॥

भावार्थ:-तेली, कुम्हार, चाण्डाल, भील, कोल और कलवार आदि वर्ण में नीच हैं।
स्त्री के मरने पर अथवा घर की संपत्ति नष्ट हो जाने पर सिर मुँड़ाकर संन्यासी हो जाते हैं॥3॥

2️⃣ बादहिं सूद्र द्विजन्ह सन हम तुम्ह ते कछु घाटि।
जानइ ब्रह्म सो बिप्रबर आँखि देखावहिं डाटि॥99 ख॥

भावार्थ:- शूद्र ब्राह्मणों से विवाद करते हैं (और कहते हैं) कि हम क्या तुमसे कुछ कम हैं? जो ब्रह्म को जानता है वही श्रेष्ठ ब्राह्मण है। (ऐसा कहकर) वे उन्हें डाँटकर आँखें दिखलाते हैं॥99 (ख)॥

4️⃣ ते बिप्रन्ह सन आपु पुजावहिं। उभय लोक निज हाथ नसावहिं॥
बिप्र निरच्छर लोलुप कामी। निराचार सठ बृषली स्वामी॥4॥

भावार्थ:-वे अपने को ब्राह्मणों से पुजवाते हैं और अपने ही हाथों दोनों लोक नष्ट करते हैं। ब्राह्मण अपढ़, लोभी, कामी, आचारहीन, मूर्ख और नीची जाति की व्यभिचारिणी स्त्रियों के स्वामी होते हैं॥4॥

5️⃣ सूद्र करहिं जप तप ब्रत नाना। बैठि बरासन कहहिं पुराना॥
सब नर कल्पित करहिं अचारा। जाइ न बरनि अनीति अपारा॥5॥

भावार्थ :-शूद्र नाना प्रकार के जप, तप और व्रत करते हैं तथा ऊँचे आसन (व्यास गद्दी) पर बैठकर पुराण कहते हैं। सब मनुष्य मनमाना आचरण करते हैं। अपार अनीति का वर्णन नहीं किया जा सकता॥5॥

6️⃣ ते बिप्रन्ह सन आप पुजावही,उभय लोक निज हाथ नसावही।

भावार्थ :- जो लोग ब्रह्मण से सेवा/ काम लेते हैं, वे अपने ही हाथों स्वर्ग लोक का नाश करते हैं

7️⃣ अधम जाति मै विद्या पाएँ। भयऊँ जथा अहि दूध पिआएँ
(उ०का० 105 क 03)

भावार्थ :- नीच जाति (SC,ST,OBCs) विद्या/ज्ञान प्राप्त करके वैसे ही जहरीले हो जाते हैं जैसे दूध पिलाने के बाद साँप।

8️⃣ आभीर(अहिर) जमन किरात खस,स्वपचादि अति अधरूप जे!!
(उ• का• 129 छं•01 ) भावार्थ :-यादव, मुसलमान, कोल,किरात, खस, श्वपचादि बहुत ही पापी होते हैं|
जाति बता दिया,जो एक षडयंत्र के सिवा कुछ नहीं है|

9️⃣ काने खोरे कूबरे कुटिल कुचली जानि।।
(अ• का• दोहा 14)

भावार्थ :-दिव्यांग abnormal का घोर अपमान, जिन्हें भारतीय संविधान ने उन्हें तो एक विशेष इंसान का दर्जा दिया & विशेष हक-अधिकार भी दिये)

1️⃣0️⃣ सति हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्वग्य,कीन्ह कपटु मै संभु सन नारी सहज अग्य
(बा • का• दोहा 57क)

भावार्थ 😦 नारी स्वभाव से ही अज्ञानी)बाकि अथॅ खुद समझे ।

1️⃣1️⃣ ढोल गवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी ।।

भावार्थ :-ढोल, गंवार और पशुओं की हीे तरह # शूद्र (SC,ST,OBCs) एव साथ-साथ # नारी को भी पीटना चाहिए)
( सु•का• दोहा 58/ 03)

1️⃣2️⃣ पुजिए बिप्र शील गुण हीना,शूद्र न पुजिए गुण ज्ञान प्रविना*

भावार्थ:- ब्रह्मण चाहे शील-गुण वाला नहीं है फिर भी पूजनीय हैं और शूद्र (SC,ST,OBCs)चाहे कितना भी शीलवान,गुणवान या ज्ञानवान हो मान-सम्मान नहीं देना चाहिए)

इस प्रकार से अनेको जगह जाति एवं वर्ण के नाम रखकर अपशब्द बोला गया है। पुरे रामचरितमानस व रामायण मे जाति के नाम से गाली दिया गया है।
इसी रामायण मे बालकाण्ड के दोहा 62 के श्लोक 04 मे कहा गया है, कि जाति अपमान सबसे बड़ा अपमान है।

इतना अपशब्द लिखने के बाद भी हमारा शूद्र/अछुत समाज (SC, ST, OBCs) रामायण को सीने से लगा कर रखे हुए है, और हजारो , लाखो रूपये खर्च कर रामधुन (अष्टयाम ) कराते है। कर्ज मे डूबे रहते है। बच्चे को सही शिक्षा नही देते है और कहते है कि भगवान के मर्जी है ।

शिक्षित बने जागरूक बने
कुछ (SC,ST,OBCs) लोग पढ़ने-लिखने के पश्चात (डाॅ भीमराव अंबेडकर जी) के लिखे गए संविधान के आधार पर नौकरी पाते है और कहते है कि ये सब राम जी के कृपा से हुआ है।।

जागो शिक्षा ही सवोॅपरि है ।
यदि आप (भगवान राम ) के कृपा से ही पढे लिखे और नौकरी पाए तो आपके पिताजी, दादाजी, परदादाजी & दादी, नानी, परदादी, इत्यादि भी पढे लिखे होते नौकरी पेशा मे होते!

यदि सब राम (भगवान )के कृपा से ही हुआ है, तो आप बताइए कि अंग्रेज़ के राज के पहले एक भी शूद्र (SC,ST,OBCs) पढ़ा लिखा विद्वान बना हो?

उस जमाने मे डाक्टर भीमराव अम्बेडकर जी पढे थे जिन्होने जरूरत मंद को अधिकार दिलवा गये ।।।

मेरे प्यारों!!
आप शूद्र/अछूत अर्थात मूलनिवासी (SC,ST,OBCs) जो भी कुछ है, भारतीय संविधान के बल पर ही है।

इसलिए हम सब का परम कर्तव्य बनता है कि भारतीय संविधान की रक्षा करें।
संविधान सवोॅपरि है l

जय भारत

रामचरितमानस

Leave a comment